
कुछ समय पहले टीवी पर एक विज्ञापन आता था जिसमे एक लडकी एक बुजुर्ग महिला को मंदिर की घंटी अपने फोन के माध्यम से सुनाती है दरअसल ये विज्ञापन एक मोबाईल नेटवर्क का था जो भावनाओं को केवल भुना रहा था और विज्ञापन की सच्चाई पर कुछ संदेह हो सकता है वो विज्ञापन सत्य हो या न हो लेकिन एक बात तो खुश करने वाली है कि आज उस विज्ञापन की तरह बाबा अमरनाथ की गुफा में भी मोबाइल की धुन सुनाई देगी।हजारों लोग अपनी सलामती की खबर अब अपने फोन के माध्यम से अपने परिवार के लोगों तक पहुँचा सकेंगे।कश्मीर का ये क्षेत्र वैसे भी संवेदनशील है और मोबाईल की सुविधा से कम से कम लोगों के मन में एक भय का वातावरण तो कुछ कम होगा गौरव की बात एक और है कि बाबा की गुफा में मोबाइल की शुरुआत करने का श्रेय भारत की सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल को जाता है ये एक अच्छा संदेश है,इससे सरकारी कंपनी की तरफ जनता का विश्वास तो बढेगा ही बल्कि इसके साथ सरकार को राजस्व की भी प्राप्ति होगी घाटी में बीएसएनएल की ये पकड़ सैनिकों के लिए भी स्वाभाविक रुप से एक आशा की किरण बनकर उभरी है।बाबा कि गुफा में सुरक्षित यात्रा कराने का जिम्मा अपने कांधों पर उठाए सैनिक भी अब अपने घर मे बच्चे की किलकारियाँ सुन सकेंगे।उन्हे भी फसल कटने का संदेशा मिल पाएगा बहन की शादी पक्की होने की खबर भी अब उनके कानों को सुनाई देगी। सरकार के इस प्रयास की सराहना सभी को करनी चाहिए।बस आशा ये है कि घाटी में विकास की गति को रोकने वालों के खिलाफ सरकार अपना रुख जरा साफ करेगी।बाबा की गुफा में शुरु होने वाली इस सुविधा के दुरुपयोग की ओर भी सरकार को थोडा ध्यान रखना पडेगा फिलहाल इस नई सेवा का स्वागत करे और जोर से जयकारा लगाकर कहें जय बाबा बर्फानी..........!
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