
हर तरफ विरानियाँ है
कहीं टूटे दरख्त तो कुछ झड़े हुए पत्ते पडे़ हैं
राहों में
कुचले जा रहे हैं
पैरों तले
कुछ एलिट जूते तो
कभी मजदूर की टूटी चप्पलों तले
हर बार कुचल रहा है
उन्हें कोई
पहचान करना जरा मुश्किल है
लेकिन ये जरुर कहा जा सकता है
कि हर कोई कुचल रहा है
किसी दूसरे के अरमानों को.
कहीं टूटे दरख्त तो कुछ झड़े हुए पत्ते पडे़ हैं
राहों में
कुचले जा रहे हैं
पैरों तले
कुछ एलिट जूते तो
कभी मजदूर की टूटी चप्पलों तले
हर बार कुचल रहा है
उन्हें कोई
पहचान करना जरा मुश्किल है
लेकिन ये जरुर कहा जा सकता है
कि हर कोई कुचल रहा है
किसी दूसरे के अरमानों को.
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