Saturday, October 2, 2010

मुल्ला भए मुलायम


एक बार फिर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को मु्ल्ला मुलायम कहने का दिल कर रहा है।वैसे मुलायम ये उपाधि पाकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे होंगे।उन्हें पहली बार इस उपाधि से 90 के दशक में नवाजा गया जब उन्होंने पहली बार अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाई थी।मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति मुलायम पर सदैव हावी रही है।हो भी क्यों न,आखिर उत्तरप्रदेश में मुस्लिमों की संख्या भी तो सबसे ज्यादा है।यूपी की राजनीति में मुस्लिमों को दरकिनार करके सत्ता का सपना देखना फिजूल की बात जान पड़ती है।मुलायम अपने विरोधाभासी बयानों एक बार फिर फंसते नजर आ रहे हैं क्योंकि अयोध्या का फैसला आने से पहले मुलायम अदालत के फैसले को ही सर्वमान्य बता रहे थे अब जब फैसला आ गया है तो मुलायम उसे मुस्लिम विरोधी बता रहे हैं।वो एक तरफ तो कहते हैं कि देश आस्था से नही संविधान और कानून से चलता है वही दूसरी तरफ वो एक फैसले को धर्म विशेष के खिलाफ बता रहे हैं।वो इलाहाबाद हाईकोर्ट की विश्वसनीयता पर भी उंगली उठा रहे हैं उनका कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ही सबूतों के आधार पर फैसला करेगा जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो पाएगा।मुलायम तो ऐसे बोल रहे हैं कि जैसे हाईकोर्ट ने फैसला सबूतों के आधार पर न किया हो।दरअसल न्यायपालिका पर इस तरह के आरोप लगाना भी कोर्ट की अवमानना है।संवैधानिक तौर पर असंतु्ष्ट पक्ष को सर्वोच्च न्यायालय में अपील करनें का पूरा अधिकार है लेकिन ये क्या कि आप न्यायालय पर सबूतों के आधार पर फैसला न देने का आरोप लगा दें।मुलायम की मौजूदा बयानबाजी राजनीतिक मजबूरियाँ हो सकती है लेकिन ये बयानाबाजी देश के लोगों खासकर मुसलमानों के मन में न्यायालय के प्रति अविश्वास ही पैदा करेगी।इस अविश्वास के घातक परिणाम भी देश को नुक्सान पहुँचा सकते हैं।देश के प्रत्येक राजनीतिक दल ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और फैसले की संवेदनशीलता को जानते हुए देशवासियों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की भी अपील की है।लेकिन देश की फ़िजाओं में मुलायम जहर घोलने पर उतारु हैं।अयोध्या मामला हमेशा से जितना संवेदनशील रहा है उतना ही ये वोट जुगाडू भी रहा है।बेशक हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया हो लेकिन अयोध्या विवाद मर गया या इस पर राजनीति नही होगी ये नही कहा जा सकता।एक तरफ जहाँ मुस्लिमों का एक बहुत बड़ा धड़ा हाईकोर्ट के फैसले को उचित मानकर विवाद को खत्म करने का विचार कर रहा है वहीं मुलायम का ये बयान मु्स्लिम समाज में भारतीय न्यायिक व्यवस्था के प्रति गहरा अविश्वास पैदा करेगा।मुलायम का ये बयान आगामी विधानसभा चुनाव में जनाधार बटोरने की कवायद के रुप में भी देखा जा सकता है।बहरहाल कुछ भी हो चुनावी प्रपंचों की आड़ में देश के संविधान और न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त से बाहर है.खैर ये अयोध्या है साहब राजनीति का अड्डा कहें तो अतिश्योक्ति नही होगी.

No comments:

Post a Comment