Tuesday, December 14, 2010

अनुपमा की हत्या,हर घर में अनुपमा


मोहब्बत का अंजाम ये हुआ कि जंगल में प्रेमिका से पत्नी बनी अनुपमा की लाश के टुकड़े मिले। मोहब्बत का ये अंजाम शायद अनुपमा ने सोचा न होगा। अनुपमा ने मोहब्बत तो की मगर उसने इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नही दिया कि आखिर वो मोहब्बत किससे कर रही है।बात देहरादून में हुई अनुपमा की हत्या की हो रही है जिसमें हत्यारा कोई और नही बल्कि अनुपमा का पत्ति ही निकला। पत्नी के हत्यारे पत्ति तो हमारे देश में कई मिल जाएंगे लेकिन राजेश गुलाटी नाम के इस शख्स ने मोहब्बत करने वालों के लिए एक मिसाल कायम कर दी। राजेश गुलाटी ने जिस तरह से अपनी पत्नी की हत्या की है वो वाक्ये में ही वीभत्स है। ये घटना ये सोचने पर भी मजबूर करती है आखिर पत्नी की लाश के साथ कोई व्यक्ति दो महीने कैसे बिता सकता है। इस घटना ने पूरे देश में हाहाकार मचा दिया है। मीडिया वाले भी बेचारे लगे हुए थे गैंगरेप की खबरों में, उन्हें भी खिलवाड़ करने के लिए विषय मिल गया। वैसे राजेश ने इसी मामले में कुछ अच्छा किया कि मीडिया को कुछ दिन खेलने के लिए खबर दे दी। मीडिया में बार बार दिखाई जाने वाली खबर ने आधुनिक प्रेमी युगलों के मन मे एक दूसरे के लिए शंका पैदा कर दी है। अब प्रेमिका प्रेमी के शादी के प्रस्ताव के बाद कहती है कि कहीं अनुपमा की तरह मुझे भी तो मार नही दोगे!प्रेमिका प्रेमी से पूछती है कि जानू ये बताओ कि अगर हम झगड़ा करेगें तो तुम मुझे मनाओगे या काटकर फैंक दोगे।प्रेमिका का ये इमोशनल अत्याचार काफी हास्यास्पद लगता है औऱ उसके साथ गंभीर भी लगता है कि आखिर प्रेमिका को ये पूछने की जरुपत पड़ क्यों रही है? राजेश जैसे लवर कन्वर्टेड पत्ति का ये चेहरा भी हो सकती है अनुपमा ने ये सोचा भी नही होगा। एक फिल्म देखकर राजेश ने अनुपमा की फिल्मी स्टाईल में हत्या कर दी। बड़े इत्मीनान राजेश ने पत्नी के टुकड़े जंगल तक पहुँचाए वाया फ्रीज। दरअसल ये सीधे तौर पर ये इंगित करता है कि लोगों में भावनाएं लगभग मर चुकी है औऱ उन्हें खत्म करने में भौतिकवादी चीजों ने बड़ी भूमिका निभाई है।इस खबर को देखकर ये भी मालूम होता है कि संभ्रात जिंदगी जी तो जा सकती है लेकिन आपके मरने के बाद आपके पड़ोसी को भी ये खबर नही लगेगी कि पड़ोस में रहने वाले अनुपमा जैसों की मौत हो चुकी है।अब लोगों के अंदर भावनाएं मर चुकी है उनके पड़ोस की एक महिला कई दिनों से घर में दिखाई नही देती लेकिन लोगों को कोई मतलब नही है। खैर टीवी चैनलों में तरह तरह के ग्राफिक्स औऱ क्रोमास् के साथ दिखाई जाने वाली देश की इस भयानक कहानी को दिखाकर लोगों को सोचने पर तो मजबूर कर ही दिया है। राजेश ने अपने इकबालिया बयान में एक बात कही कि अक्सर उसका पत्नी से झगडा होता रहता था। शायद यही झगड़ा अनुपमा की मौत का कारण भी बना। अनुपमा ने थाने में एक रिपोर्ट लिखवाकर ही इतिश्री मान ली मगर उसने उस घरेलू हिंसा के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाया हो ऐसा नही नजर नही आता।शायद अनुपमा कोई बडा कदम उठाती तो आज वो अपने पत्ति की हैवानियत का बखान करने में के लिए हमारे सामने खड़ी होती। ये मामला घरेलू हिंसा के खिलाफ महिलाओं को आवाज उठाने के लिए भी प्रेरित करेगा। दशहरे को रावण वध की जगह राजेश मे मन में एक हैवान ने जन्म लिया।उसी हैवान ने राजेश को ये हरकत करने के लिए प्रेरित किया। अब राजेश खुद को बचाने के लिए और जनता की सहानुभूति प्राप्त करने के लिए ये कहता फिर रहा है कि उसने अनुपमा की हत्या बच्चों कि लिए की।उसका ये बयान गले से नही उतरता अब उन्ही बच्चों ने राजेश के खिलाफ गवाही दी। बच्चों का सहारा लेकर राजेश बच नही सकता। सरकार को भी ये नियम बनाने चाहिए कि घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं का सामना करने के लिए महिलाओं को प्रेरित किया जाए। एयरकंडिशन कमरों में घरेलू हिंसा एक्ट पर चर्चा से महिलाएं सुरक्षित नही हो सकती उनकी सुरक्षा के लिए जागरुकता और मॉनिटरिंग की जरुरत है। इसी का अभाव है कि अनुपमा जैसी महिलाओं को जान गंवानी पडती है। ईश्वर अनुपमा की आत्मा को शांति दे।और उसके हत्यारे पत्ति को कड़ी से कडी सजा मिले। सरकारी महकमों को सदबुद्धि मिले कि वो मॉनिटरिंग करें क्योंकि भारत की ये सच्चाई है कि यहाँ लगभग हर घर में एक अनुपमा रहती है।

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