अन्ना हजारे का अनशन रंग ला रहा है। अभी तो सिर्फ दो ही दिन हुए है, अभी तो पूरा आंदोलन बाकी है। जिस तरह से समय के साथ साथ सरकारी नुमाइंदो के बयान लोगों के सामने आ रहे है उससे तो यही साबित होता है कि सरकार के मन में कही न कहीं डर व्याप्त हो चुका है। डर व्याप्त होना स्वाभाविक भी है क्योंकि जिस तरह से अन्ना के समर्थन में देश भर के लोग या ये कहें कि विदेशों के लोग भी उतर आए है उससे सरकार बुरी तरह से डर गई है। आने वाले समय में चुनाव भी है उससे सरकार को अपना जनाधार जाने का डर लगा ही हुआ है। पाँच राज्यों में होने वाले चुनाव सरकार के लिए निश्चित तौर पर लोकसभा चुनावों की जमीन तो तैयार करेंगे ही उसके साथ उनका परिणाम कार्यकर्ताओं के उत्साह को भी प्रभावित करेगा। जिस तरह से इस आंदोलन की धार तेज हो रही है उससे अन्ना के साथ विशाल जनसमर्थन जुड़ता जा रहा है। एक फौज के रूप में लोग विभिन्न माध्यमों को अपना हथियार बनाए हुए हैं। जिस रुप में लोगों को जो माध्यम मिल रहा है लोग उस माध्यम से अन्ना के समर्थन में उतर गए है। अन्ना के साथ जो लोग खड़े हैं वो अपने राजनीतिक व्यक्तिव की वजह से नही अपितु सामाजिक जिम्मेदारियों की वजह से पहचाने जाते है। जिनमें बाबा रामदेव, अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और स्वामी अग्निवेश के नाम शामिल है। अब एक ही मंच पर जब इतने लोग इकट्ठे होंगे तो स्वाभाविक है कि सरकार पर गहरा दवाब बनेगा।लेकिन इन सब के बाद अन्ना के समर्थन में सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर जो माहौल बना है उससे एक नई क्रांति का सूत्रपात हो रहा है। देश के हाइली क्वालिफाइड वर्ग में भी अन्ना का संदेश फेसबुक, टिव्टर ऑरकुट के माध्यम से धड़ाधड़ पहुँच रहा है। आश्चर्य की बात ये है कि इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर कार्टून केरेक्टरों के चित्र को टेग करने वाले युवा भी अन्ना पर लिखे कमेंट को ध्यान से पढकर उस पर उनका साथ देने का वादा कर रहे हैं। कुछ लोग इसकी आलोचना भी कर रहे है, और कुछ तो पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर अन्ना के आंदोलन को टाइम फिजूली का हथकंडा भी मान रहे हैं। लेकिन गौरतलब बात ये है कि अन्ना अब जंतर-मंतर के आंदोलन से फेसबुक, टिव्टर, ऑरकुट तक अपनी पहुँच बना चुके है। लोग मेल के आसरे अन्ना के आंदोलन के कई रुप अपनी मित्रमंडली में पहुँचा रहे हैं। फेसबुक लोगों के आमंत्रण का माध्यम बन रहा है। समाज के प्रति जागरूक लोग अपनी वॉल पर जाकर अपने समूह के लोगों को आंदोलन में आने का निमंत्रण भेजा। भारत की जनता के मस्तिष्क में एक ग्लैमरस छवि बनाए हुए हमारे बॉलीवुड के कलाकार भी अन्ना को टिव्टर के माध्यम से खूब समर्थन दे रहे हैं।
हाल ही में जिस तरह से इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने अपनी भूमिका निभाई है उसने निश्चित तौर पर कई क्रांतिकारियों को तो पैदा कर ही दिया है। मिस्त्र, लीबिया, यमन और न जाने उन जैसे कितने ही देशों में इन साइट्स का लोहा माना गया है। ओबामा को अमेरिकी राष्ट्रपति बनाने में भी इन साइट्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गौरतलब बात ये है कि हमारे देश के तथाकथित इंफोटेनमेंट न्यूज चैनलों ने भी सोशल नेटवर्किंग को हाथों हाथ लिया है। कई न्यूज चैनलों ने तो अपने हर बुलेटिन में टिव्टर पर आने वाले कमेंट्स को जगह देनी शुरू कर दी है। इस मामले में टाइम्स नाऊ ने सबको पछाड़ दिया है। मंत्री नेता पत्रकारों को बाइट देने से पहले सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर पहले कमेंट लिख देते हैं। दरअसल ये साइट्स खबर प्राप्ति का एक दमदार माध्यम बनती जा रही है। अब मुंबई में बैठी शिवानी दिल्ली में बैठे अपने दोस्त नाजिम को अन्ना के आंदोलन की गतिविधियाँ बताती है। अन्ना सोशल नेटवर्किंग साइट्स के हीरो बन चुके हैं और उनका आंदोलन बन चुका है महान फिल्म का प्रदर्शन। हम चाहते हैं कि अन्ना को उनकी इस फिल्म के लिए जल्दी ही ऑस्कर मिले और बेस्ट निर्देशक का अकादमी अवार्ड मिले किशन बाबूराव हजारे यानि अन्ना हजारे को।
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