
तेरे झूठ से मुझे कोई गिला नही है,
मेरे सच की तूने कभी परवाह नही की,
सोचा था,तेरी परवाह से तेरा माज़ी बन जाऊंगा,
लेकिन तूने मुझे बाग के फूल सा उखाड़ फेंका
राह चलते तेरा ही ख्याल किया करता था,
पर तूने उस अंजूमन को उजाड़ दिया.
बड़ी मुश्किल से संभलना सीख रहा था,
लेकिन महफिल में फिर तेरा नाम जिक्रे-आम हो गया.
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