Tuesday, November 30, 2010

गद्दारों के खिलाफ जनता ही हथियार

चंडीगढ के बाद कोलकाता में भी अलगाववादी नेता मीरवाईज को मुंह की खानी पडी।दरअसल ये तो ट्रेलर है।लोकतंत्र की दुश्वारियों के चलते मीरवाईज देश में बकवास कर रहे हैं। लेकिन जिस तरह से उसे कश्मीर के बाहर विरोध का सामना करना पड रहा है उससे मीरवाईज झल्ला गए है।ये आश्चर्य नही होना चाहिए अगर मीरवाईज के कश्मीर पहुँचने के बाद कश्मीर की फिजा फिर गर्म हो जाए। देशद्रोहियों को सजा देना सत्ता के दलालों के बस की बात नही है उन्हें तो सजा जनता ही दे सकती है। अरुंधति राय औऱ गिलानी के खिलाफ मुक्दमा दायर करने की अनुमति ने ये साबित कर दिया है जनता को देश को बचाने के लिए फिर से रक्त शिराओं में उबाल लाना पड़ेगा।वरना कानून की देवी तो वैसे भी आंखों पर पट्टी बांधे सिर्फ ख़ड़ी ही रहती है।सार्वजनिक स्तर पर जनता को ही इन देशद्रोहियों के खिलाफ खडे होकर विरोध करना पड़ेगा।केस दर्ज होगा तो फिजूल में प्रचार मिलेगा ये वाहियात बात कहकर देश के गृहमंत्री ने अपना पिंड तो छुटा लिया लेकिन क्या वो इसकी गारंटी देने के लिए तैयार हैं कि अरुंधति औऱ गिलानी फिर कहीं बकवास नही करेंगे। दरअसल सत्ता में भी इन देशद्रोहियों की अच्छी खासी पकड है जिसके कारण ये लोग हमेशा से बचते आए हैं। वोट बैंक की राजनीति भी इन मामलों में गंभीर भूमिका निभाती है। बहुत दुख की बात है कि जो काम कार्यपालिका को करना चाहिए था उस बात का संज्ञान पहले न्यायपालिका ने लिया। लेकिन सरकार को भी ये समझ जाना चाहिए कि देश की जनता को ज्यादा समय तक गुमराह नही किया जा सकता देशप्रमियों को जहाँ भी मौका मिलेगा वो राष्ट्रदोहियों का विरोध करने में पीछे नही हटेंगे। वैसे तो गृहमंत्री आतंकवाद को रंग देने में कोई कसर नही छोडते अब सवाल ये उठता है कि वो अरुंधती औऱ गिलानी को किस रंग का आतंकवादी मानेंगे ? वहीं मंत्री जी से हमारा सवाल कि हम आपके परिवार के बारे में अपशब्द कहना कबसे शुरु करें?

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