Friday, April 6, 2012

वसंत की हत्या


पगडंडियों पर ग्रील लग गई है,

हरा पेंट भी हो गया है

विकास नज़र आता है, चलिए अच्छा है।

सुना है पगडंडियों के बनने से पहले

पेड़ थे यहाँ, कई पौधों के आसरे,

राहगीर रास्ता तय करते थे,

कंक्रीट की सड़कों ने,

रास्ता तो पक्का कर दिया,

लेकिन छिन गया,

कई परिंदों का घर,

हरे पत्तों की सौंधी खुशबू

शहर हैं बाबू,

वसंत की रोज़ हत्या होती है यहाँ!

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