उठ,रग में भर जोश नया,
दुश्मन पर तू प्रहार कर,
माँ फिर तुझे पुकारती,
है दर्द से चिंघाड़ती,
धमनियों में ज्वार दे,
रक्त को संचार दे,
शमशीर को धार दे,
रणक्षेत्र में दहाड़ दे,
कपट का तू संहार कर,
लपट सा तू तेज ला,
आर्य की संतान तू,
आर्यवृत है देश तेरा,
गौरवी इतिहास को,
फिर से तू स्मरण कर,
सूर्य के तेज सा,
छा जा तू चमन पर,
नपुंसकों के बीच में,
मर्दानगी बघार दे,
राष्ट्र के लिए जीएं,
मारें राष्ट्र के लिए,
ये भावना तू मन में धर,
रवि सा तू प्रखर संवर,
वो सुबह फिर से आएगी,
ये भूमि खिलखिलाएगी,
कलियुग का ये प्रमाण है,
शक्ति ही विद्दमान है,
कुटुंब को परे हटा,
ये मातृभु पुकारती,
जो सींचे खून से इसे,
ये उसको ही दुलारती..
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