एक दिन मैं अकेला था,
फिर एक दिन दो जान हुआ,
आज फिर वो तन्हाई खाए जाती है
रह-रह कर मुस्कुराते अतीत की याद दिलाती है
सोचा जी लेंगे किसी और की आस में,
सोचा न था तेरी भी आस लगी थी हमसे
सूरज की रोशनी में,
एक उजाला ढूंढना चाहा
रात की तन्हाई में खुद को भुलाना चाहा,
लेकिन,ये हो न सका,
तोडकर किसी की हसरतें
कमब्ख्त दिल रो भी न सका
सोचा इतने कमसब्र नही थे हम
लेकिन तेरी मोहब्बत में,वो भी हो गया,
जो कभी हो न सका
अब मुराद करते हैं,
फरियाद करते हैं,लौट आ,
एक बार फिर जीने का मौका दे,
बिखरी माला को पिरोकर,
एक खूबसुरत तोहफा दे,
वादा रहा तुझसे,
लौट कर फिर न जाऊँगा,
अर्थी पर हुँ एक बार फिर,
तु मिली तो जिंदगी ढूँढ लाऊँगा.
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